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What is illiteracy in hindi - निरक्षरता की जानकारी

साक्षरता जीवन की पूर्णता, सम्पन्नता और सक्षमता का प्रमाण है ! जीवन को जीने के लिए आवश्यक प्राथमिक शिक्षा की प्राप्ति ही साक्षरता कहलाती है और इसका अभाव ही निरक्षरता ! आजादी के इतने वर्ष बाद भी आज देश के दूर-दराज के दुर्गम- ग्रामीण क्षेत्रो में साक्षरता की स्थिति चिंताजनक है ! किसी भी परिस्थिति या कारणवश व्यक्ति का शिक्षा से वंचित रह जाना या उसे यह प्राथमिक शिक्षा का अवसर प्राप्त ही नहीं हो पाना निरक्षरता के ही दायरे में आता है.


बढती जनसंख्या, बेरोजगारी, आर्थिक संसाधनों में लगातार आती कमी, लड़का-लड़की में किया गया भेदभाव और महंगाई आदि मुख्य समस्याओं से इसमें लगातार इजाफा होता आया है ! ग्रामीण क्षेत्रो में सुविधाओं की कमी से इसका आकार दिनों दिन बढ़ रहा है ! विधालयो, शिक्षको और यातायात के साधनों की कमी, अनिश्चित विधुत-आपूर्ति, सडको की कमी, जन-चेतना और जाग्रति में कमी आदि से देश के गाँवों में आज भी यह समस्या एक मुख्य चुनौती के रूप में बनी हुई है.

निरक्षरता के कारण:-

एक सर्वे के अनुसार आज भी देश के चार करोड़ बच्चो ने विधालय का मुह तक नहीं देखा है ! गरीब परिवारों की कई लडकियों का स्कूल जाना एक सपना ही है ! स्त्री शिक्षा का स्तर तो देशभर में चिंताजनक है ! आज भी गाँव के सरकारी विधालयो का स्तर यह है की किसी में पढने को कमरे और शौचालय नहीं है, कही अध्यापक नहीं है और ये सब है तो वह पहुचने को सड़क और साधनों की कमी है ! देश के कई क्षेत्रो में महिला अध्यापको की कमी है इस वजह से अधिक उम्र की लडकियों को अभिभावक विधालय भेजने से कतराते है ! कई बार परिवार की आर्थिक स्थिती ख़राब होने से उनसे घर के काम में मदद ली जाती है जिनसे उनकी पढ़ाई बीच में ही छुट जाती है ! बाल-विवाह जैसी कुरीति भी निरक्षरता को बढ़ावा देती है ! आज भी घर-परिवार में काम का बोझ लडको के मुकाबले लडकियों पर अधिक है ! गाँवों में पांच से सात वर्ष की होने पर ही इनसे काम लिया जाने लगता है और इसे माता-पिता के काम में हाथ-बंटाने की संज्ञा दे दी जाती है ! विधालयो में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक के सैंकड़ो पद कई सालो तक खाली पड़े रहते है, और यदि यह पद भर भी जाये तो फिर शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रो में शिक्षण कराने में रूचि ही नहीं लेते है ! आज भी कई विधालयो में पुस्तकालय और खेल के मैदान की कमी है ! निशुल्क स्तर पर गणवेश और पुस्तके देने के बावजूद लोग सुविधाओं के अभाव में सरकारी की अपेक्षा निजी विधालय को प्राथमिकता देते है जिससे गरीब व्यक्ति उस स्तर तक पैसा खर्च नहीं कर पाता और उसके बच्चो को शिक्षा से वंचित रहना पड़ता है ! जिसके फलस्वरूप प्रवेश के आंकड़े कम होने से वह विधालय समायोजित कर दिया जाता है.

निरक्षरता के प्रभाव:-

इस प्रकार मनुष्य के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का अधिक महत्व है क्योंकि यही उसे सामाजिक और आर्थिक जीवन-जीने का सामर्थ्य प्रदान करती है और व्यक्ति के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाती है ! इससे मानव का बोद्धिक और मनोवैज्ञानिक स्तर भी बढ़ता है ! शिक्षा के अभाव में बचपन में बच्चो के कोमल मस्तिष्क का मानसिक विकाश नहीं हो पाता और यह कमी बड़े होने पर उनके चरित्र में यथास्थिति रह जाती है ! अशिक्षित व्यक्ति सही गलत की परख अपने विवेक से नहीं पर पाता और उसे अपने निर्णय लेने में भी परेशानी होती है ! शिक्षा की यह कमी उसे रोजगार से लेकर जीवन पर्यंत उसके सामाजिक जीवन में खलती रहती है ! परिस्थिति चाहे जो भी रही हो किन्तु उम्र का यह स्तर पार कर लेने के बाद उसे शिक्षा पाने का यह अवसर जीवन में दोबारा से मिल ही नहीं पता और वह घर –परिवार और समाज की जिम्मेदारियों के तले दब सा जाता है ! आधुनिक युग में अशिक्षित व्यक्ति को शिक्षा की कमी अधिक खलती है और जीवन के हर स्तर पर वह इसकी आवश्यकता को महसूस करता है ! महिला-सशक्तिकरण में शिक्षा अत्यंत आवश्यक है बिना शिक्षा के सरकारी साक्षरता के कार्यक्रमों की कोई उपयोगिता ही नहीं रह जाती है ! सरकार की बालिका कल्याण की योजनाओ का कोई ओचित्य नहीं है.

उपसंहार:-

शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और निरक्षरता को जड़ से मिटाने के लिए सरकार को और समाज को मिलकर काम करना होगा तभी यह गंभीर समस्या नियंत्रित हो सकती है ! सरकार को उच्च स्तर में बालिका शिक्षा निशुल्क करने, साईकिल और लैपटॉप का वितरण करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा की पहले प्राथमिक स्तर की शिक्षा पाना और उनका विधालय जाना संभव हो सके ! आज भी सरकार की और से सकल उत्पाद का सिर्फ छह प्रतिशत ही शिक्षा पर खर्च होता है ! इस प्रकार प्राथमिक शिक्षा तो हमारे जीवन की बुनियाद और जीवन की मूलभूत आवश्यकता है.


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