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Light Festival "Diwali" in Hindi - दीपावली की जानकारी?

हिन्दू धर्म में लगभग हर रोज कोई न कोई त्यौहार होता है ! इन सब त्योहारों में भी होली, दशहरा और दीपावली मुख्य त्यौहार माने जाते है ! प्रकाश-पर्व अर्थात दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है ! यह जीवन में प्रकाश फ़ैलाने वाला पर्व भी माना गया है ! इस दिन अमावस्या की वह अँधेरी रात दीपक और मोमबत्ती आदि की रोशनी से जगमगा उठती है ! चारो और का सम्पूर्ण द्र्श्य प्रकाशमान हो जाता है ! यह खेतो में खड़ी धान की फसल के भी तैयार होने का समय होता है इसलिए किसान परिवार और व्यापारी वर्ग भी इसका उत्सुकता से इंतज़ार कर रहे होते है.

दीपावली एक बड़ा त्यौहार है और यही इस पर्व की विशेषता है जो पांच दिन तक चलता है ! इसी वजह से लोगो में लगभग एक सप्ताह तक उमंग और उत्साह बना रहता है ! इसकी शुरुआत धन तेरस नामक पर्व से होती है ! इस दिन घर में कोई न कोई नया बर्तन खरीदने की परंपरा है और इसे शुभ भी माना जाता है ! इसके बाद छोटी दिवाली, फिर मुख्य त्यौहार दिवाली मनाया जाता है ! और इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है ! सबसे अंत में पांचवे दिन भाई-बहिन का त्यौहार भैया-दूज मनाकर त्योहारों की इस लंबी श्रंखला का सुखद समापन होता है.

अन्य कई पर्व के समान दिवाली का भी धार्मिक और पौराणिक महत्व है ! धन की देवी लक्ष्मी समुद्र-मंथन के चौदह रत्नों में से इसी दिन प्रकट हुई थी ! इसके अलावा जैन सम्प्रदाय के मतानुसार यह महावीर स्वामी का महानिर्वाण दिवस भी है ! भारतीय संस्कृति के आदर्श पुरुष भगवान श्री राम आज ही के दिन लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे ! उनकी वापसी पर खुश होकर अयोध्यावासियो ने रौशनी से घर सजाये, बंदनवार बनाये, अपने घरो और महलो का रंग-रोगन आदि किया गया ! अपने प्रिय राजा के वापस राज्य में लोटने की ख़ुशी में रात में दीपो की माला बनाकर भी सजाया तभी से यह दीपावली अर्थात दीपो की अवली का त्यौहार दीप-पर्व बन गया और इसी दिन प्रति वर्ष दीपक जलने की नयी परंपरा का चलन शुरू हो गया जो आज तक अनवरत रूप से जारी है.

इतिहास की कुछ अन्य घटनाओ पर नजर डाले तो भी दीपावली का दिन विशेष महत्व का लगता है ! सिक्खों के छट्टे गुरु हरगोविंद सिंह आज ही के दिन मुग़ल शासक ओरंगजेब की कैद से मुक्त हुए थे ! उज्जैन के राजा विक्रमादित्य का आज ही के दिन सिंहासन-अभिषेक हुआ था ! आचार्य विनोबा भावे जो की सर्वोदयी नेता भी कहे जाते है, उन्होंने भी आज ही के दिन अपनी अंतिम श्वास ली ! प्रसिद्ध वेदांती स्वामी रामतीर्थ और आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी आज ही के दिन मोक्ष प्राप्त की थी ! इस प्रकार कई महान हस्तियों का दीपावली के इस दिन से विशेष सम्बन्ध है.

हर किसी को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ अपने इस सबसे बड़े त्यौहार के आगमन की प्रतीक्षा होती है ! इस पर्व के आने से महीने भर पहले से ही लोग अपने घरो की साफ़ सफाई और रंग-रोगन आदि करने लगते है ! भिन्न-भिन्न प्रकार की सजावट भी होने लगती है ! दुकानदार अपनी दुकाने सजाने लगते है और व्यापारी लोग नए बही-खाते शुरू होते है ! बाजारों में रंग-बिरंगी पताका लग जाने से माहौल किसी मेले जैसा हो जाता है ! पटाखों की दूकान पर खूब बिक्री और आतिशबाजी होती है ! खील-बताशे और मिठाइयो की अपार बिक्री होती है ! घरो में भी कई प्रकार की मिठाइयाँ और व्यंजन बनाये जाते है.

संध्या वेला में शुभ मुहूर्त में धन की देवी माँ लक्ष्मी का पूजन किया जाता है ! यह इस त्यौहार का मुख्य दिन भी मन जाता है ! ऐसी मान्यता है की इस रात्रि माता लक्ष्मी का आगमन होता है जिसे सफाई और रौशनी अत्यधिक प्रिय होती है ! इस दिन एकल परिवार भी संयुक्त परिवार बन जाते है और घर के सारे सदस्य इस दिन एक साथ होते है ! इसके बाद लोग एक दुसरे के घरो में जाकर कुशल-क्षेम पूछते है और अन्य बड़ो से आशीर्वाद भी लेते है ! घर-घर में मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है.

सामाजिक परंपरा के साथ ही वैज्ञानिक द्रष्टि से भी इस त्यौहार का अलग ही महत्व है ! गहन साफ़-सफाई और पटाखो की आतिश बाजी से वातावरण में व्याप्त कई प्रकार के कीटाणु समाप्त हो जाते है और समूचा पर्यावरण ही स्वास्थ्यवर्धक हो जाता है.

कुछ लोग मंगल कामना के इस पर्व पर शराब आदि पीते है और जुआ भी खेलते है जो हमारी सामाजिकता और इस प्रकाश पर्व की नकारात्मक छवि दिखाता है ! आतिश बाजी के लिए छोड़े जाने वाले पटाखों आदि से कई प्रकार की दुर्घटना हो जाने से जन धन की हानि हो जाती है ! ऐसी बुराइयों पर अंकुश लगाने की अत्यधिक आवश्यकता है.


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