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भारत को India किसने और कब कहा - Bharat Ko India Kisne Kaha?

प्रस्तावना:- प्राचीन काल से आर्यावृत भूमि को ही भारत नाम की संज्ञा मिली हुई थी किन्तु इसका नया नाम ‘इन्डिया’ युनानियो की देन है ! इसकी भू-धरा पर अनेको प्रसिद्ध युद्ध हुए, और राजाओ के पीढ़ी दर पीढ़ी शासन चले ! यह भारत भूमि महान हिमालय से लेकर अनेक बारहमासी नदियों, सदाबहार वनों, घाटियों –कंदराओ और मैदान-पठारों की कई वर्षो से साक्षी रही है ! इसके कई क्षेत्रो की विशेषता ही इसे अन्य देशो की भोगोलिक परिस्थतियो से अलग और अप्रतिम बनाती है ! इसके समान एक ही जगह पर इतनी विषमताओ वाला कोई देश संसार में अन्य दूसरा नहीं है.

विशालता:- भारत के भौतिक स्वरूप की बात की जाये तो यह अत्यंत ही विशाल और मिला-जुला क्षेत्र है जो कई प्रकार की प्राकर्तिक सीमओं में बंटा हुआ है ! हिमालय रंजे के नाम से जाने वाला इसका उत्तरी क्षेत्र मध्य यूरोप तक फैली हुई पहाड़ियों का क्रम है ! यह बलूचिस्तान से बर्मा तक फैला हुआ है ! संसार की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरेस्ट इसी क्षेत्र में पायी जाती है ! गंगा और यमुना जैसी विशाल और भारत की जीवन रेखा कहे जाने वाली नदिया हिमालय के गर्भ से ही निकली है ! ढलान क्षेत्र होने से ये नदिया विधुत उत्पादन में उपयोगी है ! इसके समानांतर निचले क्षेत्रो में घास के मैदान और घाटियों की प्रचूरता है ! हिमाचल और कश्मीर जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इसी क्षेत्र में आते है.

सतलज-गंगा और ब्रह्मापुत्र नदी का मैदान उत्तर और दक्षिण के पठार के मध्य स्थित है और दुनिया का सबसे उपजाऊ मैदान भी मन गया है ! इसीलिए यह देश का सर्वाधिक जनसंख्या बाहुल्य वाला क्षेत्र है ! ब्रह्मपुत्र कैलाश मानसरोवर से निकलती है और तिब्बत में सांगपो नाम से जानी जाती है ! पश्चिमी मैदानों में वर्षा की कमी से थार का मरुस्थल पाया जाता है ! रेट के धोरो में बालू मिटटी के ये टीले अपना स्थान बदलते रहते है ! दूसरी और दक्षिण का पठार अत्यंत ही कठिन चट्टानी पत्थरों के अपक्षय से बना है ! सारे दक्षिण भारत में इसका प्रचार-प्रसार पाया जाता है ! धरातल पथरीला होने से बारिश का जल सोंख नहीं पाता है और प्राय: बाढ़ आ जाया करती है ! ब्राह्मणी, वैतरणी, कावेरी आदि इस क्षेत्र की प्रमुख नदिया है ! इसकी दक्षिणी शाखा में इलायची की पहाडिया मुख्य है और नीलगिरि पर्वत की सबसे ऊँची चोटी अनाई मुड़ी मानी गयी है ! इसके तटीय मैदान गंगा नदी के मुहाने से लेकर कुमारी के अंतरीप तक फैले हुए है ! इस क्षेत्र में नदियों का वेग पश्चिम की नदियों के मुकाबले अत्यंत कम है और यहाँ धान की फसल प्रचुर मात्रा में ली जाती है ! महानदी, गोदावरी और क्रष्णा यहाँ की प्रमुख नदिया है ! गोलकुंडा का मैदान और चिल्का तथा पुलीकट झीले अधिक प्रसिद्ध है ! इसका पश्चिमी तटीय मैदान भी कन्याकुमारी से कच्छ के रण तक फैला हुआ है ! इसका उत्तरी भाग कोंकण तथा दक्षिणी भाग मालाबार कहलाता है ! मुख्य नदियों में नर्मदा, ताप्ति, लूनी, साबरमती प्रमुख है ! यहाँ की नदियों का वेग अधिक तेज होने से इस क्षेत्र में कृषियुक्त भूमि कम ही रह जाती है ! इस क्षेत्र में नारियल, चाय, रबर आदि फसले मुख्य रूप से उगाई जाती है ! यही प्रसिद्ध गिर नेशनल पार्क है जहा प्रसिद्ध एशियाई सिंह पाए जाते हैं ! पामबन भारत और श्रीलंका के बीच पाए जाने वाले द्वीपों का समूह है जो अत्यंत ही पौराणिक है ! तूतीकोरन के पास hare iland भी पाया जाता है जिसमे असंख्य खरगोश पाए जाते है ! श्री हरिकोटा द्वीप को अन्तरिक्ष केंद्र बनाया गया है ! भागीरथी हुगली और पदमा मेघना के मध्य संसार का सबसे बड़ा डेल्टा बनता है ! सुन्दरी के पेड़ो की अधिकता होने से यह क्षेत्र सुंदरवन कहलाता है ! भारत की प्रसिद्ध झीलों में वुलर, डल-झील लुनार, नैनिताल, भीमताल, कोलेरू आदि मुख्य है और दूसरी और राजस्थान में स्थित सांभर, डीडवाना, पञ्चभद्रा आदि प्रमुख खारे पानी की झीले है ! ये झीले टेथिस सागर की अवशेष है और इसी वजह से इनका जल नमकीन हो गया है ! भारत में पाए जाने वाले जल-प्रपातो में जोग प्रपात-कर्नाटक, शिवासुन्द्रम-तमिलनाडु, चुलिया जलप्रपात-कोटा, महाबलेश्वर और कपिलधारा आदि प्रमुख है !

विभिन्नता में एकता :- इस प्रकार घोर विषमता भरे क्षेत्र एक ही देश में पाए जाना भारत को प्रक्रति की अनुपम देन है ! सालभर के मौसम चक्र में यहाँ कई प्रकार की जलवायु बनती और बिगडती रहती है ! दक्षिण भारत में भीषण गर्मी पड़ती है और तापमान आग की तरह 48 डिग्री तक चला जाता है तो उत्तर भारत में बर्फीली हवाओं से कडाके की ठण्ड तापमान को कई दिनों तक शीतनिद्रा में ले जाती है और समूची प्रक्रति हिमयुग में बदल जाती है ! रेगिस्तान में मरुस्थल की वीरानी है तो मैदानी क्षेत्रो में उपजाऊ भूमि में लहलहाती फसलो से असीमित संसाधन और चहकता अपार जन-जीवन !
सभ्यता और संस्कृति का अनूठा संगम :-


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